Thursday, January 14, 2016

राधा की हर सांस पुकारे,मोहन,मोहन

राधा की हर सांस पुकारे,मोहन,मोहन,मोहन,मोहन
मोहन की हर सांस पुकारे, राधा,राधा,राधा,राधा
कौन बताए किसको पुकारा,किसने कम या ज़्यादा
राधा,मोहन,मोहन राधा,मोहन मोहन राधा.

प्राण  तो फूंके श्यामा  उसमें,बंसी बेशक श्याम की
जब से श्याम हुआ  श्यामा का,और श्यामा हुई श्याम की
दोनो पूरे,दोनो अधूरे,ना पूरा कोई आधा
राधा,मोहन,मोहन राधा,मोहन मोहन राधा.

कोई कहे राधा है सुंदर, बनवारी तो काला
कोई कहे वो निरी ग्वालन, सुंदर मुरली वाला
राधा बोले मोहन सुंदर,मोहन बोले राधा
राधा,मोहन,मोहन राधा,मोहन मोहन राधा.

भक्त पुकारें राधा को तो मोहन दौडे आएं
और मोहन का ध्यान करो तो राधा नज़र समाए
देहि  दो पर जान एक है, मोहन कहो या राधा
राधा,मोहन,मोहन राधा,मोहन मोहन राधा.

5 comments:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शनिवार (16-01-2016) को "अब तो फेसबुक छोड़ ही दीजिये" (चर्चा अंक-2223) पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    नववर्ष 2016 की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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    1. बेहद शुक्रिया डा साहब । कृपा दृष्टि बनाए रखिएगा ।

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  2. सुन्दर व सार्थक रचना प्रस्तुतिकरण के लिए आभार! मकर संक्रान्ति पर्व की शुभकामनाएँ!

    मेरे ब्लॉग की नई पोस्ट पर आपका स्वागत है...

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    1. जी अवश्य ।
      आपकी मकर संक्राति पूरे उत्साह से मनी होगी ।
      समय निकाल कर आप इधर आए और मेरा उत्साहवर्द्धन किया आभार

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  3. आदरणीय डा मयंक जी
    इस कृपा के लिए बहुत आभारी हूँ ।
    यह पहला अवसर नहीं है आप अक्सर ही मेरी रचनाओं को पाठकों के लिए प्रस्तुत करते हैं ।
    हृदय तल से धन्यवाद

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